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नीट में विद्यार्थियों की जीत, परीक्षा में शामिल होने का मौका मिला

25 हजार विद्यार्थियों को राहत, रंग लाई एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट की पहल कोटा. सीबीएसई द्वारा नेशनल इलेजिब्लिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) नोटिफिकेशन में कुछ विशेष विद्यार्थियों को परीक्षा से वंचित रखने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरूवार को प्रारंभिक फैसले में सभी आवेदनकर्ता विद्यार्थियों को उनके वर्गानुसार वैकल्पिक रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान कर दी है।

एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट द्वारा इस मामले में विद्यार्थियों का हर स्तर पर सहयोग किया गया। अधिवक्ता उपलब्ध करवाए गए, जिन्होंने विद्यार्थियों के पक्ष में दलीलें दी। इस निर्णय के बाद देशभर में नीट की तैयारी कर रहे करीब 25 हजार विद्यार्थियों को राहत मिली है। अधिवक्ता अर्चना पाठक दवे, मनीष शर्मा एवं प्रकाश झा ने बताया कि गुरूवार को सभी पक्षकारों की बहस पूरी होने पश्चात कोर्ट ने अपने अंतिम फैसला सुरक्षित रखा।

साथ ही विद्यार्थियों के हितों को सुरक्षा प्रदान करते हुए सीबीएसई व एमसीआई को ऐसे सभी वंचित विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल करने के निर्देश दिए। इन विद्यार्थियों के प्रवेश पत्र जारी करने के लिए भी कहा। कोर्ट ने भी कहा कि जिन भी विद्यार्थियों ने परीक्षा की तैयारी की और आवेदन किया है, उन्हें वैकल्पिक रूप से परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान की जा रही है।

इस मामले की सुनवाई परीक्षा के परिणाम आने से पहले पूरी कर ली जाएगी। अंतिम निर्णय के आधार पर जो पात्र होगा, वही आगे की प्रक्रिया में शामिल हो सकेगा। यह निर्णय आने के बाद कोटा में नीट की तैयारी कर रहे सैकड़ों प्रभावित विद्यार्थियों के चेहरे खिल उठे। दो तथा तीन वर्ष से नीट की तैयारी कर रहे इन विद्यार्थियों को नीट नोटिफिकेशन में परीक्षा से वंचित कर दिया गया था।

विद्यार्थियों के लिए इस हक की लड़ाई में एलन कॅरियर इंस्टीट्यूट द्वारा पहल की गई और विद्यार्थियों के लिए अधिवक्ता उपलब्ध करवाए गए। इस मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने भी विद्यार्थियों का हित देखते हुए प्रतिदिन सुनवाई की तथा सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद उक्त आदेश दिए।

गौरतलब है कि सीबीएसई के नोटिफिकेशन के अनुसार ओपन स्कूल के छात्र, अतिरिक्त विषय के तौर पर जीवविज्ञान का चयन करने वाले छात्र, 11वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने में दो वर्ष से अधिक का समय लेने वाले छात्र इस परीक्षा के निए आवेदन नहीं दे सकते थे। इस मामले में न्यायालय ने विद्यार्थियों को परीक्षा में आवेदन की छूट दी थी और अब परीक्षा में बैठने की अनुमति प्रदान कर दी है।

 

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